यहाँ जन्मसिद्ध अधिकार के रूप में "स्वतंत्रता" अभिप्रेत है। यह बाल गंगाधर तिलक के प्रसिद्ध कथन "स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है" की भावना से जुड़ा है।