“प्रति + उपकार” में “इ” के बाद भिन्न स्वर “उ” आता है। यण संधि के नियमानुसार “इ” के स्थान पर “य्” हो जाता है, जिससे “प्रत्युपकार” बनता है। इसलिए यहाँ यण संधि है।