पुरुषोत्तम का समास-विग्रह है “पुरुषों में उत्तम”। यहाँ किसी वर्ग में श्रेष्ठ होने का भाव है। इसी कारण इसे सामान्यतः सप्तमी तत्पुरुष की दृष्टि से समझाया जाता है।