“घोड़े बेचकर सोना” मुहावरे का अर्थ है पूरी तरह निश्चिंत या बेफिक्र होकर सोना। इसका शाब्दिक अर्थ घोड़े बेचना नहीं है। भाव यह है कि व्यक्ति को किसी चिंता या जिम्मेदारी की परवाह नहीं रह गई।