करुण रस का स्थायी भाव "शोक" है। प्रिय व्यक्ति की मृत्यु, वियोग, विपत्ति, हानि या दुखद स्थिति से उत्पन्न शोक जब काव्य में रस रूप ग्रहण करता है, तब करुण रस की निष्पत्ति होती है। इसलिए सही उत्तर "शोक" है।