इसमें राम-नाम को सीधे “रतन-धन” के रूप में प्रस्तुत किया गया है। “जैसे”, “सा”, “समान” आदि तुलना-सूचक शब्द नहीं हैं। यही रूपक अलंकार की विशेषता है—उपमेय पर उपमान का सीधा आरोप। “चारु चंद्र की चंचल किरणें” में अनुप्रास है, जबकि “फूल-सी” वाला उदाहरण उपमा है।